PHUL
Ronak Upadhyay
WRO0904649
Mumbai, Maharashtra
Ek tha beta padhne mai hushaar,
nhi the uske koi dost naa koi yaar,
padhne ki iccha toh thi uski par...Par,
Kya kare ,
khud kamake karta tha padhai,
maa baap mai humesha hoti thi ladayi,
samajh gaya kam umar mai ki khushi paise se nhi shaanti se hai aati*2
vo bhi ho gaya tha thoda jazbaati,
ab ye haal ho gaya hai vo hushaar dimaag kahi kho gaya hai*2,
isiliye kehna hai ki apne jhagdo se rakho baccho ko durr*2,
kya pata kal ban jaye kaate aapke ye phul.
THE GIRL WHO REFUSES TO DISAPPEAR!!
Muskan Khatri
WRO0747769
Akola, Maharashtra
भटकी मंज़िल के बिछड़े रास्तों में कहीं थी,
अंधेरे कमरे में रोशनी की उम्मीद थी,
किस से और कैसे मैं जानूं अपनी मंज़िल का रास्ता,
कहानी मेरी थी पर मैं कहीं उसमें छुपी हुई थी।
कब कैसे छुपते-छुपने की आदत लग गई थी,
कोशिश बहुत की लेकिन सामने आ नहीं पाती थी,
खुद के साथ होकर भी मैं कहीं अधूरी थी,
मेरे छुपने से तकलीफ़ क्या मेरे अपनों को होती थी?
डर था सामने आते से कहीं मैं पूरी न खो जाती,
आदत नहीं हालात ने मुझे यह सीख सिखा दी,
क्या ज़रूरी था मेरा छुपना या मैं लड़ना सीख जाती?
या यह सवाल तब पूछने का हक भी मैं कहीं खो देती?
कहानी मेरी पर मैं कहीं छुपी हूँ,
अब पुरानी दास्तां बदलने का फैसला कर चुकी हूँ,
सवाल थे या शिकायतें, इससे मैं दूर हो चुकी हूँ,
छुपना सीख लिया अब लड़ना मैं चाहती हूँ,
अपने डर से या ग़लत से भागने वाली अब मैं नहीं हूँ,
कहानी मेरी है और मैं इसे खुद लिखने वाली हूँ।